प्रशांत महासागर में दस्तक दे रहा है ‘सुपर एल नीनो’: इतिहास के सबसे विनाशकारी मौसम चक्र की आशंका

 

  • प्रशांत महासागर में दस्तक दे रहा है ‘सुपर एल नीनो’: इतिहास के सबसे विनाशकारी मौसम चक्र की आशंका
नई दिल्ली : वैश्विक मौसम वैज्ञानिकों ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है, जिसके मुताबिक प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में एक बेहद शक्तिशाली ‘सुपर एल नीनो’ (Super El Niño) आकार ले रहा है।

वैज्ञानिकों के शुरुआती मॉडल्स का अनुमान है कि साल 2026-27 के दौरान आने वाला यह एल नीनो इतिहास का सबसे भीषण और गर्म मौसम चक्र साबित हो सकता है।
अगर यह आशंका सच साबित होती है, तो दुनिया भर के कृषि, अर्थव्यवस्था और मानव जीवन पर इसके बेहद गंभीर और विनाशकारी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।

क्या होता है ‘एल नीनो’ और ‘सुपर एल नीनो’ ?
सामान्य शब्दों में, एल नीनो (El Niño) एक ऐसी प्राकृतिक घटना है जिसमें प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का पानी सामान्य से बहुत अधिक गर्म हो जाता है। इसके कारण वैश्विक हवाओं का रुख बदल जाता है, जिससे पूरी दुनिया के मौसम का संतुलन बिगड़ जाता है।
जब यह समुद्री तापमान सामान्य से 2°{C} या उससे भी अधिक बढ़ जाता है, तो इसे ‘सुपर एल नीनो’ की श्रेणी में रखा जाता है। इतिहास में अब तक केवल कुछ ही बार (जैसे 1982-83, 1997-98 और 2015-16 में) सुपर एल नीनो दर्ज किया गया है, और हर बार इसने दुनिया भर में तबाही मचाई है।

🌍 वैश्विक प्रभाव: कहाँ कैसा रहेगा मौसम ?
इस सुपर एल नीनो का असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरी पृथ्वी के वेदर पैटर्न को बदल कर रख देगा :-
भारत : कमजोर या अनियमित मानसून, भीषण गर्मी, सूखे (Drought) का खतरा और बेहद हल्की सर्दियां।
ऑस्ट्रेलिया : रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव, भयंकर सूखा और जंगलों में भीषण आग (Bushfires) की आशंका।
पेरू और द. अमेरिका : पश्चिमी तटों पर सामान्य से कई गुना ज्यादा भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़।
अमेरिका : दक्षिणी राज्यों में अत्यधिक बारिश और बाढ़, जबकि उत्तरी हिस्सों में असामान्य रूप से गर्म सर्दियां।
अफ्रीका : पूर्वी अफ्रीका में बाढ़ के हालात, जबकि दक्षिणी अफ्रीका में पानी की भारी किल्लत और सूखा।
यूरोप : सीधे तौर पर नहीं, लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से असामान्य मौसम और गर्म सर्दियों का अनुभव।

भारत पर क्या होगा इसका असर ?
भारत के लिए यह खबर बेहद चिंताजनक है क्योंकि भारतीय कृषि और अर्थव्यवस्था काफी हद तक दक्षिण-पश्चिम मानसून पर निर्भर करती है।
कमजोर मानसून और सूखा : सुपर एल नीनो के कारण मानसून की हवाएं कमजोर पड़ सकती हैं, जिससे देश के कई राज्यों में सूखा पड़ने की आशंका है।
खाद्य सुरक्षा पर संकट : बारिश कम होने से धान, गन्ना और दलहन जैसी खरीफ फसलों के उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ सकती है।
भीषण गर्मी (Heatwaves) : 2026 और 2027 के महीनों में गर्मियों के दौरान तापमान सारे रिकॉर्ड तोड़ सकता है, जिससे जल संकट गहरा जाएगा।
सर्दियों का गायब होना : इसके प्रभाव से सर्दियों के मौसम में भी सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया जा सकता है, यानी ठंड का अहसास काफी कम होगा।
वैज्ञानिकों की चेतावनी और तैयारी की जरूरत :
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के कारण एल नीनो और अधिक खतरनाक रूप ले रहा है। प्रशांत महासागर में जमा हो रही यह अतिरिक्त गर्मी एक बड़े खतरे का संकेत है।

विशेषज्ञों की राय : “दुनिया भर की सरकारों को अभी से ही जल संरक्षण, आपातकालीन खाद्यान्न भंडारण और हीटवेव से निपटने की नीतियां बनानी शुरू कर देनी चाहिए। देर करने पर इसके आर्थिक और सामाजिक परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं।”

यह आने वाला समय पूरी मानवता के लिए प्रकृति की एक बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है, जिसके लिए दुनिया को अभी से कमर कसनी होगी।

SS NEWS MP
Author: SS NEWS MP

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