
Supreme Court On Stray Dogs : आवारा कुत्तों की समस्या किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित नहीं है. दिल्ली-एनसीआर से लेकर केरल, तमिलनाडु, बिहार, पश्चिम बंगाल जैसे तमाम राज्यों से आवारा कुत्तों द्वारा हमला करने की खबरें सामने आती रहती हैं. यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. देश की शीर्ष अदालत ने पिछले साल नवंबर में इस मसले पर फैसला दिया था, जिसे बरकरार रखा गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर अपने पूर्व के फैसलों को बदलने की मांग को खारिज कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और उनसे जुड़ी सार्वजनिक सुरक्षा चिंताओं को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अपने 25 नवंबर के आदेश में बदलाव करने से साफ इनकार कर दिया है. अदालत ने स्कूलों, अस्पतालों, रेलवे स्टेशनों और अन्य संस्थागत क्षेत्रों से सभी आवारा कुत्तों को हटाने के निर्देश को बरकरार रखा है. साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि हटाए गए कुत्तों को दोबारा उसी स्थान पर छोड़ने की अनुमति नहीं होगी. अदालत ने कहा राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों का यह दायित्व है कि लोगों के जीवन की रक्षा करे. राइट टू लाइफ की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने डॉग लवर्स की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें कुत्तों को शेल्टर में भेजने के फैसले को बदलने की मांग की गई थी।
मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ की अगुवाई वाली बेंच ने की. सुनवाई के दौरान अदालत ने देशभर में बढ़ती स्ट्रे डॉग्स की समस्या पर गंभीर चिंता जताई और राज्यों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुपात में आवश्यक बुनियादी ढांचे का विकास नहीं किया गया. अदालत के मुताबिक नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान बिना किसी ठोस और दीर्घकालिक योजना के चलाए गए, जिसके कारण पूरे तंत्र का उद्देश्य प्रभावित हुआ.
राज्य सरकारों पर तीखी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि यदि राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों ने समय रहते दूरदर्शिता के साथ काम किया होता, तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती. अदालत ने यह भी संकेत दिया कि सार्वजनिक स्थानों पर लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मुद्दे पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आवारा कुत्तों से होने वाली घटनाओं और बढ़ती शिकायतों के बीच महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अदालत के निर्देशों के बाद अब राज्यों और नगर निकायों पर संस्थागत क्षेत्रों को आवारा कुत्तों से मुक्त रखने और प्रभावी नियंत्रण नीति लागू करने का दबाव बढ़ गया है.



