
भोपाल/इंदौर : मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए एक बेहद बड़ा और बहुप्रतीक्षित निर्णय लिया है। कैबिनेट की बैठक में नई ट्रांसफर पॉलिसी (Transfer Policy) को मंजूरी दे दी गई है, जिसके तहत आगामी 1 जून से 15 जूनतक प्रदेश में तबादलों का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। इस फैसले के बाद से ही मध्य प्रदेश के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल अचानक तेज हो गई है।
लंबे समय से इंतजार कर रहे कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत
पिछले काफी समय से ट्रांसफर बैन हटने का इंतजार कर रहे लाखों शासकीय सेवकों के लिए यह खबर बड़ी राहत लेकर आई है। जो कर्मचारी या अधिकारी लंबे समय से एक ही स्थान पर जमे थे या पारिवारिक व स्वास्थ्य कारणों से अपने गृह जिले या मनचाही जगह पर जाना चाहते थे, वे अब 1 जून से आवेदन कर सकेंगे।
पारदर्शिता और ऑनलाइन प्रक्रिया पर रहेगा विशेष जोर
सूत्रों के मुताबिक, मोहन सरकार की इस नई ट्रांसफर नीति में पारदर्शिता (Transparency)को सबसे ऊपर रखा गया है। सिफारिशों और गड़बड़ियों को रोकने के लिए इस बार ऑनलाइन प्रक्रिया को काफी मजबूत और प्राथमिकता पर रखा जाएगा। पारदर्शी व्यवस्था के जरिए कोशिश की जा रही है कि केवल पात्र और जरूरतमंद कर्मचारियों को ही बिना किसी परेशानी के ट्रांसफर का लाभ मिल सके।
सियासी और प्रशासनिक समीकरण भी बदलेंगे
15 दिनों की इस सीमित अवधि में होने वाले तबादलों में केवल प्रशासनिक आवश्यकताएं ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक समीकरण भी बेहद अहम भूमिका निभाएंगे। जिलों में कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को गति देने के हिसाब से अधिकारियों की नई जमावट की जाएगी।
लॉबिंग और चर्चाओं का दौर शुरू
कैबिनेट के इस फैसले की भनक लगते ही अब मंत्रालय (वल्लभ भवन) से लेकर जिला मुख्यालयों तक चर्चाओं और लॉबिंग का दौर शुरू हो गया है। अपनी पसंद की जगह पर पोस्टिंग पाने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों ने गुणा-भाग लगाना शुरू कर दिया है।
1 जून से लेकर 15 जून तक का यह पखवाड़ा मध्य प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी के लिए बेहद गहमागहमी भरा रहने वाला है।
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