फारस की खाड़ी-होर्मुज में तेल रिसाव से बढ़ा संकट, उपग्रह तस्वीरों में मिले संकेत, पर्यावरण पर मंडराया बड़ा खतरा
दुबई । अमेरिका और ईरान से जुड़े सैन्य तनाव के बाद फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में बड़े पैमाने पर तेल रिसाव के संकेत उपग्रह चित्रों में सामने आए हैं।
इन तस्वीरों में ईरान के केश्म द्वीप, लावान द्वीप और कुवैत तट के पास समुद्री क्षेत्र में फैला तेल स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द नियंत्रण नहीं किया गया तो यह स्थिति समुद्री जीवन, तटीय आबादी और पेयजल व्यवस्था के लिए गंभीर संकट बन सकती है।
उपग्रह तस्वीरों में सामने आया नुकसान
एक रिपोर्ट के अनुसार, सैटेलाइट इमेजरी ने न केवल तेल सुविधाओं और जहाजों को हुए नुकसान को उजागर किया है, बल्कि फारस की खाड़ी के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र पर बढ़ते खतरे को भी स्पष्ट किया है।
एक तस्वीर में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास केश्म द्वीप के नजदीक लगभग पांच मील क्षेत्र में तेल फैलाव देखा गया है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि कई क्षेत्रों में फैला तेल तटीय समुदायों की आजीविका, मछली पालन, समुद्री जीवों और समुद्री जल शोधन संयंत्रों तक को प्रभावित कर सकता है।
मानव जीवन और समुद्री जीवों पर बड़ा खतरा
डच शांति संगठन पैक्स के परियोजना प्रमुख विम ज्वाइनेनबर्ग ने चेतावनी दी है कि इस तेल रिसाव का असर लाखों लोगों पर पड़ सकता है, खासकर ईरान के तटीय इलाकों में रहने वाले समुदायों पर।
तेल प्रदूषण से मछलियों के प्रभावित होने पर मछुआरों की आय और खाद्य सुरक्षा दोनों पर असर पड़ेगा। साथ ही यह समुद्री कछुओं, डॉल्फिन और व्हेल जैसे जीवों के लिए भी गंभीर खतरा है, जो या तो तेल में फंस सकते हैं या उसे निगल सकते हैं। इसके अलावा समुद्री जल को पीने योग्य बनाने वाले डिसैलिनेशन संयंत्रों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।




