अतिथि शिक्षक वेरिफिकेशन या मानसिक प्रताड़ना? संकुल प्राचार्यों की ‘नवाबियत’ और रेंगते पोर्टल से अभ्यर्थी बेहाल!

  • अतिथि शिक्षक वेरिफिकेशन या मानसिक प्रताड़ना? संकुल प्राचार्यों की ‘नवाबियत’ और रेंगते पोर्टल से अभ्यर्थी बेहाल

भोपाल : प्रदेश में अतिथि शिक्षक वेरिफिकेशन (Guest Teacher Verification) प्रक्रिया क्या शुरू हुई, अभ्यर्थियों के लिए आफत का सैलाब आ गया है। विभाग के ढीले रवैये और संकुल स्कूलों की मनमानी ने युवाओं को सड़कों पर धक्के खाने को मजबूर कर दिया है। सरकार रोज़गार देने के दावे तो बड़े-बड़े करती है, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि एक अदद वेरिफिकेशन के लिए अभ्यर्थियों के पसीने छूट रहे हैं।

चाय-पानी की सुस्ती और ‘कल आना’ का राग

प्रदेश के कई संकुल स्कूलों से ऐसी तस्वीरें और शिकायतें आ रही हैं जिन्हें देखकर लगता है कि वहां शिक्षा विभाग नहीं, बल्कि कोई ‘शाही दरबार’ चल रहा है।

आज जमा करो, कल आना : अभ्यर्थियों का आरोप है कि कर्मचारी अपनी सुविधा से काम कर रहे हैं। दूर-दराज से भाड़ा लगाकर आने वाले युवाओं को सीधे कह दिया जाता है—*”आज दस्तावेज़ रख जाओ, बाबू कल देखेंगे।”*

नो एंट्री का बोर्ड : कुछ स्कूलों में तो साफ़ कह दिया गया कि “यहाँ वेरिफिकेशन नहीं हो रहा, कहीं और जाओ।” बेरोजगार युवा एक स्कूल से दूसरे स्कूल फुटबॉल की तरह चक्कर काट रहे हैं।

खुद को विभाग का ‘बाप’ समझ रहे कुछ संकुल प्रभारी

हैरानी की बात तो यह है कि कई संकुल प्राचार्यों और कर्मचारियों ने अपने खुद के ‘संविधान’ लिख लिए हैं। विभाग की गाइडलाइन एक तरफ, और इनकी फरमाइशें एक तरफ!

क्या मांग रहे हैं : वेरिफिकेशन के नाम पर अभ्यर्थियों से मैरिज सर्टिफिकेट (शादी का प्रमाण पत्र), मूल निवास और जाति प्रमाण पत्र जैसे वो दस्तावेज़ भी मांगे जा रहे हैं, जिनका इस चरण से सीधा कोई वास्ता ही नहीं है। नियम कायदों को ताक पर रखकर अपनी मनमानी चलाई जा रही है।

पोर्टल का ‘ब्लड प्रेशर’ हाई, दिन में 50 बार हो रहा है डाउन

एक तरफ इंसानी सिस्टम लाचार कर रहा है, तो दूसरी तरफ डिजिटल इंडिया का दम भरने वाला विभाग का आधिकारिक पोर्टल भी हांफ रहा है। पोर्टल दिन में कई-कई बार बंद हो जाता है। जब सर्वर चलता है तो स्कूल वाले गायब होते हैं, और जब स्कूल वाले बैठते हैं तो पोर्टल ‘सर्वर डाउन’ का बोर्ड टांग देता है।

अभ्यर्थियों का दर्द: “हम सुबह 9 बजे से भूखे-प्यासे लाइन में लगते हैं। कभी स्कूल वाले अपनी मर्जी चलाते हैं तो कभी कंप्यूटर की स्क्रीन चकरा जाती है। हमारी सुनने वाला कोई नहीं है।”

विभाग की ‘मौन साधना’ कब टूटेगी ?

इस पूरे बवाल में सबसे बड़ा विलेन स्कूल शिक्षा विभाग का ‘कन्फ्यूजन’ है। विभाग की तरफ से कोई भी स्पष्ट और कड़क निर्देश जारी नहीं किए जा रहे हैं, जिसका फायदा उठाकर संकुल प्रभारी अपनी मनमानी की रोटियां सेक रहे हैं।

सत्यशोधक न्यूज एमपी का सीधा सवाल : क्या सरकार और आला अधिकारी अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेंगे? क्या इन मनमानी करने वाले प्राचार्यों पर कोई कार्रवाई होगी, या प्रदेश का युवा ऐसे ही सिस्टम की बलि चढ़ता रहेगा?

रिपोर्ट : सत्याशोधक न्यूज एमपी ब्यूरो

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Author: SS NEWS MP

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