
नई दिल्ली : दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर इंसानियत को झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है। जिस ‘सिस्टम’ को महिलाओं की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था, वह एक बार फिर गहरी नींद में सोया मिला। एक चलती बस के भीतर महिला के साथ 7 किलोमीटर तक दरिंदगी का तांडव चलता रहा और दिल्ली की सड़कें तमाशबीन बनी रहीं।
सिर्फ समय पूछना पड़ा भारी
खबर के मुताबिक, इस हैवानियत की शुरुआत एक मामूली सवाल से हुई। पीड़िता ने बस ड्राइवर से सिर्फ वक्त (Time) पूछा था। मदद करने के बजाय, दरिंदों ने उसे जबरन बस के अंदर खींच लिया। इसके बाद अगले 7 किलोमीटर तक वह चीखती रही, लेकिन बस के काले शीशों ने उसकी आवाज और सिस्टम की हकीकत, दोनों को बाहर नहीं आने दिया।
नियमों की धज्जियां और सोता हुआ प्रशासन
यह वारदात महज एक अपराध नहीं, बल्कि सुरक्षा दावों की पोल खोलती एक तस्वीर है:
काले शीशे : सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद बस के शीशे काले थे, ताकि अंदर का गुनाह छुप सके।
गायब इमरजेंसी एग्जिट : बस में कोई भी चालू इमरजेंसी एग्जिट नहीं था, जिससे पीड़िता बाहर निकल पाती।
खुलेआम उल्लंघन : आखिर नियमों की धज्जियां उड़ाती यह बस सड़कों पर कैसे दौड़ रही थी? आखिर चेकिंग के नाम पर क्या खानापूर्ति हो रही थी?
कौन हैं ये दरिंदे ?
पुलिस ने इस मामले में दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया है:
- सुदेश (30 वर्ष) – ड्राइवर
- अमन (26 वर्ष) – कंडक्टर
सवाल आज भी वही है…
आज दिल्ली की हर बेटी डरी हुई है। रात के सफर से डर, अकेले निकलने से डर और हर बस-कैब में अलर्ट रहने की मजबूरी। सवाल यह है कि आखिर कब तक ?
आरोपियों पर केस तो दर्ज हो गया है, लेकिन महिलाओं की ‘सुरक्षा’ कब दर्ज होगी ?



