अब चांद की `मिट्टी` से निकलेगी ऑक्सीजन, जेफ बेजोस की कंपनी ने रचा इतिहास,क्या अंतरिक्ष में सांस लेने का संकट खत्म ?

 

जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन (Blue origin) ने चांद की धूल (रेगोलिथ) से ऑक्सीजन निकालने में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि चांद पर लंबे समय तक मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चांद पर इंसानी बस्ती बसाने की दिशा में एक क्रांतिकारी सफलता हासिल की है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने चंद्रमा की धूल (Moon Dust) से ऑक्सीजन निकालने में कामयाबी पाई है.

Moon Dust to Oxygen : अभी तक आपने सुना होगा कि चांद पर पानी की तलाश जारी है, लेकिन अब एक और बड़ी खुशखबरी सामने आई है. अमेजन कंपनी के मालिक जेफ बेजोस की स्पेस कंपनी ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) ने वह कर दिखाया है, जो कल तक किसी साइंस-फिक्शन फिल्म जैसा लगता था. कंपनी ने लैब के अंदर चांद की मिट्टी (जिसे वैज्ञानिक रेगोलिथ कहते हैं) से शुद्ध ऑक्सीजन निकालकर दुनिया को चौंका दिया है. इसके बाद अब वह दिन दूर नहीं, जब चांद पर इंसान बिना किसी भारी-भरकम सिलेंडर के वैसे ही सांस ले सकेगा, जैसे पृथ्वी पर लेता है. आइए जानते हैं बेजोस की कंपनी के इस कारनामे का पूरा सच.

कैसे बनी मिट्टी से हवा ?

चांद की मिट्टी कोई साधारण धूल नहीं है. इसमें लगभग 45% ऑक्सीजन जमी होती है, लेकिन वह सिलिका, आयरन और एल्युमीनियम जैसे खनिजों के साथ कैद होती है. अब ब्लू ओरिजिन कंपनी की ‘ब्लू अल्केमिस्ट’ (Blue Alchemist) टीम ने इसे निकालने का एक नया तरीका खोज निकाला है. इसमें सबसे पहले उन्होंने चांद जैसी नकली मिट्टी को एक बड़ी भट्टी में 1,600 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर तक गर्म किया. इतनी गर्मी कि पत्थर भी पानी की तरह बहने लगे. इसके बाद जब यह मिट्टी पिघलकर तरल (Molten) बन जाती है, तो इसमें बिजली का करंट दौड़ाया जाता है, जिसे मोल्टन रेगोलिथ इलेक्ट्रोलिसिस कहा जाता है. इस प्रोसेस से ऑक्सीजन के अणु अपने साथी खनिजों का साथ छोड़ देते हैं और गैस बनकर बाहर निकलने लगते हैं.

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Author: SS NEWS MP

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