
- बंगाल जीत के बाद भगवा विस्तार
- भाजपा – एनडीए का लगभग एक तिहाई भारत पर शासन
- नक्शे के माध्यम से हम आपको बता रहे हैं।
संपादक अमर पेंढारकर की विशेष संपादकीय
अंततोगत्वा चुनाव नतीजे आना शुरू हो गए । असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में एनडीए की ऐतिहासिक जीत ने देश की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए ने एक बार फिर अपनी राष्ट्रीय लोकप्रियता और स्वीकार्यता साबित कर दी है।
असम और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में एनडीए के ऐतिहासिक जीत ने देश की राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इंडियन एक बार फिर अपनी राष्ट्रीय लोकप्रियता और स्वीकार्यता साबित कर दी है।
असम में जहां भाजपा ने अपनी सत्ता को बचाया वहीं पश्चिम बंगाल मैं ममता बनर्जी जैसी घाघ राजनीतिज्ञ को हराने में सफलता हासिल की है ।
पश्चिम बंगाल में मिली जीत के साथ अब देश के इक्कीस राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में भाजपा या एनडीए की सरकारी कायम हो चुकी है, इससे केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति और मजबूत हुई है जबकि वह पक्षी दलों का प्रभाव मुख्य रूप से कुछ राज्यों तक सीमित रह गया है।

एनडीए का विस्तार
एनडीए शासित राज्यों में उत्तर भारत पूर्वोत्तर मध्य भारत और पश्चिमी तट का बड़ा हिस्सा शामिल है इनमें प्रमुख राज्य हैं उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, उड़ीसा और आंध्र प्रदेश पूर्वोत्तर में हिमाचल प्रदेश, नगालैंड, त्रिपुरा व मेघालय में एनडीए का नियंत्रण में है, यह विस्तार स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि एनडीए के पकड़ अब केवल हिंदी पट्टी तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे देश के विभिन्न भौगोलिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों तक फैल चुकी है।
गैर एनडीए राज्य
वही विपक्षी व क्षेत्रीय दलों के शासन वाले प्रमुख राज्य हैं तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश इसके अलावा जम्मू कश्मीर लद्दाख मिजोरम और सिक्किम गैर एनडीए खेमे में ही हैं, हालांकि इनकी संख्या कम है लेकिन इन राज्यों में क्षेत्रीय दलों की जगह अभी भी मजबूत बनी हुई है।
पश्चिम बंगाल की जीत के साथ एनडीए अब देश के जनसंख्या क्षेत्रफल और आर्थिक महत्व के बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण मजबूत कर चुका है राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस नए समीकरण का असर आने वाले समय में केंद्र राज्य संबंध नीति निर्माण और भविष्य के चुनावी रणनीतियों पर साफ दिखाई देगा इतना ही नहीं आने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह बदलते राजनीतिक परिदृश्य केंद्र की योजनाओं के क्रियान्वयन और राज्य सरकारों के साथ समन्वय को नहीं दिशा दे सकता है।



